প্রচ্ছদ / পাক নাপাক / মোবাইলে নাপাকী লাগলে তা পবিত্র করার পদ্ধতি কী?

মোবাইলে নাপাকী লাগলে তা পবিত্র করার পদ্ধতি কী?

প্রশ্ন:

ছোট বাচ্চা  মোবাইল এ পেশাব করে দিয়েছে,  এখন ঐ মোবাইল পবিত্র কিভাবে  করতে হবে??

বাটন ফোন ও টাস ফোন উভয়টির হুকুম ভিন্ন ভিন্ন বললে ভালো হবে। পাশাপাশি হাওয়ালা গুলো উল্লেখ করলে উপকৃত হতাম।

بسم الله الرحمن الرحيم
حامدا ومصليا و مسلما

উত্তর:

প্রশ্নোক্ত ক্ষেত্রে যদি মোবাইলের নাপাকের স্থান ধৌত করা সম্ভব হয় তাহলে তা তিনবার ধৌত করবে। যদি পানি স্পর্শ করার দ্বারা মোবাইল ক্ষতিগ্রস্ত হওয়ার আশংকা হয়, তাহলে তা ভেজা পাক কাপড়/টিস্যু পেপার, পেট্রোল অথবা থিনার বা কোন পাক তরল কেমিক্যাল ইত্যাদি যার দ্বারা নাপাকী দূর করা যায়, তা দ্বারা তিনবার পাক করবে এবং প্রত্যেকবার তা শুকানোর অপেক্ষা করবে।

প্রকাশ থাকে যে, প্রকাশ্য নাপাকী থেকে যেভাবে পানি দ্বারা পবিত্রতা লাভ করা যায় তেমনিভাবে তরল পবিত্র কোন বস্তু/ কেমিক্যাল দ্বারাও পবিত্রতা লাভ করা যায়।

المستندات الشرعية:
جاء فى المحيط البرهاني في الفقه النعماني: ٢٠٤/١:(ط. دار الكتب العلمية، بيروت  لبنان): والكرخي رحمه الله ذكر في «مختصره» أن السيف يطهر بالمسح من غير فصل بين الرطب واليابس وبين العذرة والبول، وعلل فقال: لأن السيف متى صقل لا تتداخل النجاسة في أجزائه بل تبقى على ظاهره، فإذا مسحها لا يبقى إلا شيء قليل وذلك غير معتبر.

وفي «الفتاوى» سئل أبو القاسم عمن ذَبَحَ بالسكين ثم مسح السكين على صوفها أو بما يذهب به أثر الدم عنه يطهر، وعنه أنه لحس السيف بلسانه حتى ذهب الأثر فقد طهر، وعن أبي يوسف رحمه الله أن السيف إذا أصابه دم أو عذرة فمسحت بخرقة أو تراب إنه يطهر حتى لو قطع بطيخاً بعد ذلك أو ما أشبهه كان البطيخ طاهراً ويباح أكله، وقد صح أن الصحابة كانوا يقتلون الكفار بسيوفهم ويمسحون السيوف ويصلون معها.

وإذا وقع على الحديد نجاسة من غير أن يمره بها فكما يطهر بالغسل يطهر بالمسح بخرقة طاهرة أيضاً، إذا كان الحديد صقيلاً غير خشن كالسيف والسكين والمرآة ونحوها. انتهى

 

و فى حاشیة الطحطاوی علی مراقی الفلاح: ص: ١٦٣، (ط: دار الکتب العلمیة):
“ويطهر السيف ونحوه” كالمرآة والأواني المدهونة والخشب الخرائطي والآبنوس والظفر “بالمسح” بتراب زخرفة لأنها لا تتداخلها أجزاء النجاسة أو صوف الشاة المذبوحة فلا يبقى بعد المسح إلا القليل وهو غير معتبر. ويحصل بالمسح حقيقة التطهير في رواية فإذا قطع بها البطيخ يحل أكله واختاره الإسبيجاني ويحرم على رواية التقليل واختاره القدوري ولا فرق بين الرطب والجاف والبول والعذرة على المختار للفتوى لأن الصحابة رضي الله عنهم كانوا يقتلون الكفار بسيوفهم ثم يمسحونها ويصلون معها.
قوله: “على المختار للفتوى” وقيل طريقه أن يمسحه بثوب مبلول ذكره السيد أي يمسح النجس اليابس. انتهى

وفى الدر المختار مع رد المحتار: ٣١٠/١(ط. دار الفكر-بيروت): يطهر (صقيل) لا مسام له (كمرآة) وظفر وعظم وزجاج وآنية مدهونة أو خراطي وصفائح فضة غير منقوشة بمسح يزول به أثرها مطلقا به يفتى.

(قوله: صقيل) احترز به عن نحو الحديد إذا كان عليه صدأ أو منقوشا، وبقوله ” لا مسام له ” عن الثوب الثقيل فإن له مساما ح عن البحر. (قوله: وآنية مدهونة) أي: كالزبدية الصينية حلية. (قوله: أو خراطي) بفتح الخاء المعجمة والراء المشددة بعدها ألف وكسر الطاء المهملة آخره ياء مشددة نسبة إلى الخراط، وهو خشب يخرطه الخراط فيصير صقيلا كالمرآة ح (قوله: بمسح) متعلق بيطهر، وإنما اكتفى بالمسح؛ لأن أصحاب رسول الله – صلى الله عليه وسلم – كانوا يقتلون الكفار بسيوفهم ثم يمسحونها ويصلون معها؛ ولأنه لا تتداخله النجاسة، وما على ظهره يزول بالمسح بحر. (قوله: مطلقا) أي: سواء أصابه نجس له جرم أو لا، رطبا كان أو يابسا على المختار للفتوى شرنبلالية عن البرهان.

قال في الحلية: والذي يظهر أنها لو يابسة ذات جرم تطهر بالحت والمسح بما فيه بلل ظاهر من خرقة أو غيرها حتى يذهب أثرها مع عينها، ولو يابسة ليست بذات جرم كالبول والخمر فبالمسح بما ذكرناه لا غير، ولو رطبة ذات جرم أو لا فبالمسح بخرقة مبتلة أو لا. انتهى

وفى الفتاوى الهندية: ٤٣/١: كتاب الطهارة، الباب السابع في النجاسة و احكامها ( ط. دار الفكر ): ومنها المسح إذا وقع على الحديد الصقيل الغير الخشن كالسيف والسكين والمرآة ونحوها نجاسة من غير أن يموه بها فكما يطهر بالغسل يطهر بالمسح بخرقة طاهرة هكذا في المحيط ولا فرق بين الرطب واليابس ولا بين ما له جرم وما لا جرم له كذا في التبيين وهو المختار للفتوى كذا في العناية ولو كان خشنا أو منقوشا لا يطهر بالمسح كذا في    التبيين

.انتهى

هكذا فى منحة السلوك في شرح تحفة الملوك ص: ٨٢، و فى درر الحكام شرح غرر الأحكام ٤٦/١ ، وفى مجمع الأنهر في شرح ملتقى الأبحر ٥٩/١ ، وفى بدائع الصنائع في ترتيب الشرائع:  ٣٦٦/١ ، .انتهى

 

والله أعلم بالصواب

উত্তর লিখনে
মুহা. শাহাদাত হুসাইন , ছাগলনাইয়া, ফেনী।

সাবেক শিক্ষার্থী: ইফতা বিভাগ
তা’লীমুল ইসলাম ইনস্টিটিউট এন্ড রিসার্চ সেন্টার ঢাকা।

সত্যায়নে
মুফতী লুৎফুর রহমান ফরায়েজী দা.বা.

পরিচালক তা’লীমুল ইসলাম ইনস্টিটিউট এন্ড রিসার্চ সেন্টার ঢাকা

উস্তাজুল ইফতা জামিয়া কাসিমুল উলুম আমীনবাজার ঢাকা।

প্রধান মুফতী: জামিয়াতুস সুন্নাহ লালবাগ, ঢাকা।

উস্তাজুল ইফতা জামিয়া ইসলামিয়া দারুল হক লালবাগ ঢাকা।

পরিচালক: শুকুন্দী ঝালখালী তা’লীমুস সুন্নাহ দারুল উলুম মাদরাসা, মনোহরদী নরসিংদী।

আরও জানুন

‘শরীকানা কুরবানীতে একজনের কুরবানী না হলে বাকিদের কুরবানী হবে না’ কথাটি সঠিক নয়?

প্রশ্ন একজন মাওলানা সাহেব বলেছেন, “শরীক কুরবানীর ক্ষেত্রে একজনের কুরবানী না হলে বাকি শরীকদের কুরবানী …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

আহলে হক্ব বাংলা মিডিয়া সার্ভিস